“करोड़ों दें तो भी कब्रों पर नहीं गाऊंगा”, जसबीर जस्सी ने डेरों को बताया ‘माइंडवॉश’ का अड्डा, चिट्टे से की तुलना

Punjab

चंडीगढ़: ‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी’ फेम मशहूर पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने मनोरंजन जगत और डेरा संस्कृति को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे पंजाब की सियासत और संगीत जगत में हड़कंप मच गया है। जस्सी ने साफ लफ्जों में कहा है कि वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे और चाहे कोई उन्हें करोड़ों रुपए का ऑफर क्यों न दे, वह कब्रों या मजारों पर जाकर कभी नहीं गाएंगे।

एक हालिया इंटरव्यू में जसबीर जस्सी का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने डेरों को समाज के लिए नशे से भी बड़ा खतरा करार दिया। जस्सी ने कहा, “डेरों को प्रमोट करना चिट्टा (नशा) बेचने से भी ज्यादा खतरनाक है। नशे से शरीर खराब होता है, लेकिन इन डेरों में तो सीधे लोगों का ‘माइंडवॉश’ किया जाता है।” जस्सी का यह सीधा हमला उन धार्मिक डेरों और गद्दियों पर है, जिनका पंजाब में गहरा प्रभाव है।

जस्सी ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए एक पुराने वाकये का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लुधियाना के एक बाबा ने उन्हें अपने डेरे के मेले में गाने के लिए 32 से 35 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि देने की पेशकश की थी। जस्सी के मुताबिक, “मैंने उस ऑफर को तुरंत ठुकरा दिया। बाद में उस बाबा ने फोन करके डींगें हांकते हुए कहा कि तुम नहीं आए तो क्या हुआ, मैं तुमसे भी बड़ा सिंगर लेकर आया और उसने परफॉर्म किया।” जस्सी ने स्पष्ट किया कि उनका उसूल है कि वह कब्र वाली जगहों पर परफॉर्म नहीं करते।

जसबीर जस्सी का यह बयान सीधे तौर पर उन पंजाबी गायकों को चुभ सकता है जो हर साल डेरों और मजारों पर लगने वाले मेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और मोटी रकम वसूलते हैं। पंजाब में मजारों और डेरों पर गायकों का जाना एक आम परंपरा रही है, लेकिन जस्सी ने इसे ‘खतरनाक खेल’ बताकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि संगीत जगत के अन्य दिग्गज इस तीखी प्रतिक्रिया पर क्या रुख अपनाते हैं।

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