Haryana Desk: हरियाणा के यमुनानगर जिले में भक्ति और श्रद्धा की एक ऐसी अनूठी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यहाँ की निवासी 24 वर्षीय इशिका ने अपनी आध्यात्मिक चेतना और आराध्य के प्रति समर्पण को नया रूप देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को अपना जीवनसाथी चुन लिया। यह विवाह केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि इसे पूरे वैदिक विधि-विधान और सामाजिक मान्यताओं के साथ संपन्न किया गया। इस अलौकिक विवाह का साक्षी बनने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
वैदिक रीति-रिवाजों और राजकीय गरिमा के साथ संपन्न हुआ विवाह
इस विवाह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोवर्धन से विशेष रूप से आए पंडित बृजभूषण भारद्वाज ने मंत्रोच्चार के साथ फेरे संपन्न कराए। विवाह में एक बेहद दिलचस्प मोड़ तब आया जब जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कमलदीप गोयल स्वयं अपनी धर्मपत्नी के साथ इस समारोह का हिस्सा बने। उन्होंने न केवल वर-वधू का आशीर्वाद लिया, बल्कि विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक ‘गठजोड़’ की रस्म को भी पूरे आदर के साथ निभाया। जहाँ एक ओर इशिका के माता-पिता राजेश कुमार और पूजा ने अपनी बेटी का कन्यादान किया, वहीं दूसरी ओर डॉ. पायल और उनके पति विशाल ने भगवान ठाकुर जी के अभिभावक बनकर अपना दायित्व निभाया।
धूमधाम से निकली बारात और ससुराल की यात्रा की तैयारी
विवाह की तैयारियां किसी पारंपरिक शादी की तरह कई दिनों पहले से ही शुरू हो गई थीं, जिसमें हल्दी और मेहंदी की रस्मों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया था। भगवान श्री कृष्ण की बारात प्रोफेसर कॉलोनी से बड़े ही भव्य रथ पर सवार होकर निकली। लगभग सात किलोमीटर लंबे इस सफर के दौरान भक्तों ने पूरी राह फूलों की वर्षा की और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए वधू पक्ष के द्वार तक पहुँचे। विवाह के पश्चात विदाई की भावुक रस्म भी अदा की गई और बुधवार को इशिका अपने ‘पति’ भगवान श्रीकृष्ण के साथ पगफेरा की रस्म के लिए मायके लौटीं। अब इशिका की इच्छा है कि वे अपने ‘ससुराल’ यानी नंदगांव और उन पवित्र स्थानों की यात्रा करें जहाँ भगवान कृष्ण का बचपन बीता था।
