Haryana Desk: हरियाणा में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और केंद्र सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के फैसले के चलते प्रदेश के होटल, रेस्तरां और ढाबों के सामने ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ईंधन संकट की मुख्य वजह और वैश्विक प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध (ईरान-इजराइल-यूएस संघर्ष) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कमी महसूस की जा रही है। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल रोक दी है। इसका सबसे बुरा असर उन रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों पर पड़ा है, जो पूरी तरह गैस पर निर्भर थे।
विभिन्न जिलों की धरातलीय रिपोर्ट
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सिरसा और भिवानी: यहाँ मिठाई की दुकानों और बड़े होटलों में सालों पुरानी डीजल भट्ठियां फिर से लौट आई हैं। भिवानी के लगभग 550 होटल-रेस्तरां इस संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
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हिसार और फतेहाबाद: हिसार की सभी 34 एजेंसियों में बुकिंग बंद है। फतेहाबाद के रतिया में गैस न मिलने पर उपभोक्ताओं ने हंगामा भी किया। यहाँ ऑनलाइन सिस्टम में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण लोग अब मैनुअल बुकिंग के लिए एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं।
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चरखी दादरी: व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस न मिलने के कारण अब लोग इलेक्ट्रिक चूल्हों, हीटरों और पारंपरिक भट्ठियों का रुख कर रहे हैं।
कालाबाजारी और प्रशासन की सख्ती
गैस की कमी के चलते हिसार जैसे जिलों में कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। जो सिलेंडर पहले 1000-1100 रुपये का था, वह अब 1500 रुपये तक में बिक रहा है।
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विशेष टीमें: खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने प्रत्येक खंड में निगरानी टीमें गठित की हैं। डीएफएससी (DFSC) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि घरेलू सिलेंडर का उपयोग व्यावसायिक कार्यों के लिए किया गया, तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
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निगरानी: एडीसी और डीएफएससी स्तर के अधिकारी लगातार गैस एजेंसियों के स्टॉक की जांच कर रहे हैं ताकि कोई स्टॉक की जमाखोरी न कर सके।
सरकार की अपील और आगामी कदम
हरियाणा सरकार ने सभी जिलों से रोजाना की रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक बुकिंग न करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि घरेलू रसोई पर इस संकट का आंच न आए, चाहे इसके लिए व्यावसायिक क्षेत्र में कुछ समय के लिए वैकल्पिक ईंधन (डीजल/बिजली) का सहारा लेना पड़े।
