हरियाणा सरकार पर रणदीप सुरजेवाला का बड़ा हमला: गेहूं खरीद और स्टोरेज को लेकर घेरा, ‘महिला आरक्षण’ पर दी चुनौती

Haryana

जींद: कांग्रेस के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने जींद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरियाणा की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुरजेवाला ने गेहूं खरीद में हो रही अव्यवस्थाओं से लेकर महिला आरक्षण और खान-पान की संस्कृति जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लिया।

 विधानसभा सत्र में गेहूं खरीद पर चर्चा की मांग

सुरजेवाला ने मांग की कि 27 अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी विधानसभा सत्र में गेहूं खरीद के मुद्दे पर पूरा दिन चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि चर्चा होने से न केवल पिछले घोटालों की जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि भविष्य की फसलों के लिए भी बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।

 स्टोरेज का संकट: “92% गोदाम भरे, अनाज खराब होने का डर”

सांसद ने सरकार पर आंकड़ों के साथ हमला बोलते हुए कहा कि राज्य के गोदाम फसलों से लबालब भरे हुए हैं:

  • क्षमता: हेफेड (HAFED), वेयरहाउस और DFC के पास स्टोरेज की 92% क्षमता पहले ही भर चुकी है।

  • बचा हुआ स्पेस: सरकार के पास अब केवल 1% स्टोरेज क्षमता शेष है।

  • चेतावनी: उन्होंने सरकार को आगाह किया कि यदि गोदामों की तुरंत ‘फ्यूमिगेशन’ (कीटाणु शोधन) नहीं की गई, तो अनाज सड़ जाएगा।

 महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री को चुनौती

महिला आरक्षण कानून पर बोलते हुए सुरजेवाला ने कहा कि विपक्ष ने 2023 में ही इस बिल का समर्थन किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, “यदि प्रधानमंत्री मोदी मुख्यमंत्री की बात सुनते हैं, तो इस बिल को बिना देरी किए तुरंत लागू करवा देना चाहिए।”

 खान-पान और संस्कृति: “भारत विविधताओं का देश है”

विभिन्न नेताओं के मांस खाने की वायरल तस्वीरों पर सुरजेवाला ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, “हरियाणा का व्यक्ति स्वभाव से शाकाहारी है, लेकिन हमें समझना होगा कि भारत के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और भोजन भिन्न है। तटीय क्षेत्रों में खेती नहीं होती, इसलिए वहां लोग मछली खाते हैं। हम दूसरों की संस्कृति का अपमान नहीं करते। यही भारत है और यही कांग्रेस की विचारधारा है।”

 मंडियों में अव्यवस्था का उठाया मुद्दा

हाल ही में अंबाला और कैथल जैसी अनाज मंडियों का दौरा करने के बाद सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि:

  • मंडियों में गेहूं के ढेर लगे हैं, लेकिन खरीद की गति अत्यंत सुस्त है।

  • उठान न होने के कारण किसान, मजदूर और आढ़ती तीनों ही भारी संकट का सामना कर रहे हैं।

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