RSS की महाबैठक: पानीपत में शताब्दी संकल्प और भविष्य का ‘ब्लूप्रिंट’

Haryana

Haryana Desk: हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई, ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ (ABPS) की तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार से शुरू हो गई है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के पड़ाव पर आयोजित यह बैठक संगठन के विस्तार और आगामी शताब्दी के रोडमैप के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रमुख उपस्थिति और भागीदारी

बैठक का नेतृत्व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले कर रहे हैं। इस महाकुंभ में देशभर से लगभग 1487 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • क्षेत्र और प्रांत के संघचालक, कार्यवाह एवं प्रचारक।

  • विश्व हिंदू परिषद (VHP), ABVP, भारतीय मजदूर संघ, सेवा भारती और भारतीय किसान संघ जैसे 32 अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी।

  • भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।

बैठक के मुख्य एजेंडे

1. UGC विवाद और सामाजिक संतुलन

संघ के एजेंडे में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर उपजा विवाद शीर्ष पर है। दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों के साथ भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए इन नियमों का उच्च जातियों द्वारा विरोध किया जा रहा है, जबकि अदालती रोक से दलित समुदायों में नाराजगी है। संघ का प्रयास है कि ऐसा बीच का रास्ता निकाला जाए जिससे सामाजिक समरसता बनी रहे और कोई भी वर्ग नाराज न हो।

2. चुनावी रणनीति (2026-2027)

बैठक में आगामी चुनावी राज्यों पर मंथन होगा:

  • 2026 के चुनाव: असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

  • 2027 यूपी चुनाव: उत्तर प्रदेश के चुनावों के मद्देनजर जातिगत समीकरणों और वोट बैंक को साधने पर चर्चा संभव है।

3. घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन

पड़ोसी देशों से हो रहे अवैध प्रवासियों (खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों) के कारण बदल रहे जनसांख्यिकीय स्वरूप पर संघ चिंतित है। पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पहचान और वापसी के मुद्दे पर चर्चा के साथ-साथ इस पर प्रस्ताव पारित होने की भी उम्मीद है।

4. संगठन का शताब्दी वर्ष और विस्तार

संघ के 100 साल के कार्यों की समीक्षा की जाएगी और अगले 100 वर्षों के लिए ‘कार्य विस्तार’ की रूपरेखा खींची जाएगी। सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए नए अभियानों की घोषणा भी हो सकती है।

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