सिख राजनीति का बड़ा टकराव: झींडा ने लगाया ‘हत्या के प्रयास’ का आरोप

Haryana

कैथल: हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के भीतर चल रही आपसी खींचतान अब एक गंभीर विवाद में बदल गई है। कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने कैथल के ऐतिहासिक नीम साहिब गुरुद्वारा में सिख संगत के साथ बैठक की, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल पर जानलेवा हमले की साजिश रचने का सनसनीखेज आरोप लगाया।

झींडा का दावा है कि पंजाब बॉर्डर के पास उन पर पिस्तौल तानकर हत्या करने की कोशिश की गई। हालांकि, बलजीत सिंह दादूवाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि झींडा केवल सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा हासिल करने के लिए इस तरह का झूठ फैला रहे हैं और उन्होंने ऐसी कोई घटना नहीं की है।

विवाद की शुरुआत मंगलवार को पंजाब के एक गांव में आयोजित एक भोग कार्यक्रम के दौरान हुई। झींडा के अनुसार, कार्यक्रम में दादूवाल ने मंच से हरियाणा कमेटी की कार्यप्रणाली पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसका विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई जो बाद में झगड़े में तब्दील हो गई। झींडा ने दावा किया कि जब वे कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे, तो दादूवाल के समर्थकों ने उनकी गाड़ी को रास्ते में रोक लिया और उनके साथ मारपीट करने की कोशिश की।

उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उन पर रिवॉल्वर तान दी और कथित तौर पर दादूवाल ने गोली चलाने का आदेश भी दिया, लेकिन उनके ड्राइवर और सुरक्षाकर्मियों की सूझ-बूझ के कारण वे बाल-बाल बच गए। झींडा का कहना है कि हमलावरों ने पंजाब बॉर्डर तक उनका पीछा किया और पुलिस की मौजूदगी देखकर वे वापस लौटे। उन्होंने पंजाब पुलिस से मांग की है कि इस मामले में हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया जाए, वरना वे पटियाला के एसपी से मुलाकात करेंगे।

वहीं दूसरी ओर, बलजीत सिंह दादूवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। दादूवाल का कहना है कि वे केवल शोक सभा में श्रद्धांजलि देने गए थे, जहां झींडा ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने पलटवार करते हुए झींडा पर ही गंभीर धार्मिक आरोप जड़ दिए हैं। दादूवाल ने दावा किया कि झींडा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की है, जिसकी शिकायत संगत द्वारा पुलिस को दी जा चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने कोई हमला किया और न ही किसी को उकसाया।

दादूवाल के अनुसार, झींडा अपनी घटती साख को बचाने और सुरक्षा का घेरा बढ़ाने के लिए यह सारा प्रपंच रच रहे हैं। वर्तमान में यह मामला धार्मिक और सियासी हलकों में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है और दोनों पक्षों के बीच की खाई और गहरी होती नजर आ रही है।

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