मुंबई। भारतीय संगीत और फिल्म जगत के लिए एक अत्यंत दुखद खबर है। ‘सुरों की मल्लिका’ के नाम से विख्यात महान गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्षीय आशा जी ने 12 अप्रैल, 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल भारत बल्कि वैश्विक संगीत जगत में एक अपूरणीय शून्यता आ गई है।
स्वास्थ्य में गिरावट और अंतिम क्षण
आशा भोसले को 11 अप्रैल की रात स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती खबरों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका जताई गई थी, जिसे बाद में उनकी पोती जनाई भोसले ने स्पष्ट करते हुए बताया था कि उन्हें अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद 12 अप्रैल को उनका निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर उसी रात उनके लोअर परेल स्थित आवास पर ले आया गया था, जहाँ देर रात तक फिल्म जगत की हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।
अंतिम संस्कार की जानकारी
परिजनों द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आज (13 अप्रैल, 2026) अंतिम विदाई की प्रक्रिया संपन्न होगी:
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अंतिम दर्शन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक, कासा ग्रांडे बिल्डिंग (टावर ए), लोअर परेल में।
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अंतिम संस्कार: शाम 4:00 बजे, शिवाजी पार्क में।
आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने प्रशंसकों और शुभचिंतकों से अपील की है कि वे शिवाजी पार्क में भीड़ न जुटाएं, ताकि व्यवस्था बनी रहे और अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
एक गौरवमयी विरासत
1933 में जन्मी आशा भोसले का संगीत करियर संघर्ष और असाधारण उपलब्धियों से भरा रहा। पिता की मृत्यु के बाद महज 9 वर्ष की आयु में उन्होंने गायकी की शुरुआत की थी।
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उपलब्धियां: उनका नाम दो बार ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ।
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अंतरराष्ट्रीय पहचान: वह ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकन पाने वाली पहली भारतीय गायिका रहीं।
बॉलीवुड ने दी श्रद्धांजलि
आशा जी के निधन से बॉलीवुड स्तब्ध है। सुपरस्टार सलमान खान ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “भारतीय संगीत जगत के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है। आशा जी के निधन की खबर सुनकर गहरा सदमा लगा। एक अतुलनीय आवाज, जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
आशा भोसले का जाना एक युग का समापन है। उनकी मखमली आवाज के जादू से सजे गीत सदियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे। भावभीनी श्रद्धांजलि!