पंजाब डेस्क: बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों में अब पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाएगी। नई SOP के तहत जांच को तकनीकी रूप से इतना मजबूत बनाया गया है कि डिजिटल सबूतों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
1. घटनास्थल पर ‘जीरो टॉलरेंस’ और मर्यादा का पालन
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त्वरित कार्रवाई: सूचना मिलते ही SHO और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचना होगा।
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सुरक्षा घेरा: सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए घटनास्थल पर डबल लेयर (अंदरूनी और बाहरी) घेरा बनाना अनिवार्य होगा।
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मर्यादा का सम्मान: श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंगों या धार्मिक प्रतीकों को संभालने के लिए केवल अधिकृत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पूर्ण धार्मिक मर्यादा का पालन किया जाएगा।
2. फॉरेंसिक और हाई-टेक जांच
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सबूतों का डिजिटलीकरण: हर मामले की हाई-रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और विस्तृत मैपिंग अनिवार्य की गई है। फॉरेंसिक टीम को मौके पर ही बुलाया जाएगा।
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AI और नेटवर्क स्कैनिंग: पुलिस केवल पकड़े गए आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जरिए सोशल मीडिया पोस्ट, डीपफेक वीडियो और अंतरराष्ट्रीय साजिशों (क्रिप्टो फंडिंग) की गहराई से जांच की जाएगी।
3. समयबद्ध जांच और उच्च निगरानी
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डेडलाइन: जांच अधिकारी को 60 से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश करना होगा।
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सुपरविजन: इन मामलों की सीधी निगरानी जिले के SSP या पुलिस कमिश्नर स्वयं करेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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मेडिकल बोर्ड: यदि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर होने का दावा करता है, तो उसकी जांच विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी।
4. कानून का सख्त शिकंजा: उम्रकैद और भारी जुर्माना
नया कानून स्पष्ट करता है कि बेअदबी अब एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें सजा का प्रावधान बेहद कड़ा है:
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सजा: 10 साल से लेकर आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक।
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जुर्माना: 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक।
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परिभाषा: पवित्र ग्रंथ को नुकसान पहुंचाना, चोरी करना, गलत जगह रखना या सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करना—ये सभी अब बेअदबी की श्रेणी में आएंगे।