कुरुक्षेत्र: जननायक जनता पार्टी (JJP) के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। हिसार के बाद अब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी (KU) प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने दिग्विजय चौटाला और जेजेपी के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और सामाजिक कार्यक्रम की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 7 अप्रैल को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के डॉ. आरके सदन में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ।
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धोखाधड़ी का आरोप: यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर (CSO) आनंद कुमार के अनुसार, कार्यक्रम की अनुमति यह कहकर ली गई थी कि यह एक ‘सामाजिक आयोजन’ है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और राजनीति में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
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राजनीतिक एजेंडा: आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्ति पर कोई चर्चा नहीं हुई, बल्कि वहां तीखे राजनीतिक भाषण दिए गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इन भाषणों से छात्रों के बीच आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वंद्विता बढ़ने का खतरा पैदा हुआ।
संपत्ति का नुकसान और प्रोफेसर पर गाज
यूनिवर्सिटी प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में 300 से 400 बाहरी लोग और छात्र शामिल हुए थे। हंगामे के दौरान हॉल की करीब 80 कुर्सियां तोड़ दी गईं और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए यूनिवर्सिटी ने पहले ही हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अजायब सिंह को निलंबित (Suspend) कर दिया था, जिनके माध्यम से इस हॉल की बुकिंग कराई गई थी।
इन दिग्गजों पर दर्ज हुई FIR
कुरुक्षेत्र पुलिस ने 17 अप्रैल को मिली शिकायत के आधार पर जेजेपी के निम्नलिखित नेताओं और पदाधिकारियों को नामजद किया है:
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दिग्विजय चौटाला (युवा प्रदेश अध्यक्ष, JJP)
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डॉ. जसविंदर खैहरा (वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष)
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विशाल मुकुमपुरा (प्रोग्राम ऑर्गेनाइजर)
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दीपक मलिक (इनसो प्रदेशाध्यक्ष)
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नवीन सुहाग, राजेश पायलट, मंजू जाखड़, राजू कुल, माही और इशिका राणा।
पुलिस ने इन सभी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों के मंच का राजनीतिक इस्तेमाल और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।