चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की शिक्षा प्रणाली एक बड़े वैश्विक बदलाव की ओर बढ़ रही है। फिनलैंड की टुर्कू यूनिवर्सिटी के साथ पंजाब सरकार के सहयोग ने स्थानीय स्कूलों के क्लासरूम का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहकर अधिक व्यावहारिक, आनंदमय और प्रभावशाली बन रही है।
शिक्षा क्रांति: रट्टा नहीं, अब होगी ‘सक्रिय भागीदारी’
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पंजाब में अब रट्टा लगाने की पुरानी परंपरा को खत्म कर ‘बाल-केंद्रित’ और ‘खेल-आधारित’ शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। फिनलैंड की यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं वहां के ‘अर्ली चाइल्डहुड केयर सेंटर्स’ का दौरा किया और उन तकनीकों को पंजाब के सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे के अनुसार ढालने पर जोर दिया।
शिक्षक प्रशिक्षण (Train-the-Trainers) मॉडल
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत शिक्षकों का प्रशिक्षण है:
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लक्ष्य: मई 2026 तक चार अलग-अलग समूहों में लगभग 300 शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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प्रशिक्षण स्थल: ये कार्यशालाएं चंडीगढ़ के साथ-साथ फिनलैंड के टुर्कू और राउमा शहरों में आयोजित की गई हैं।
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दीर्घकालिक योजना: यह कोई अस्थायी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एक स्थाई संस्थागत सुधार है। इसके तहत ‘मास्टर ट्रेनर्स’ का एक कैडर तैयार किया जा रहा है जो पूरे राज्य में इस मॉडल को फैलाएंगे।
क्लासरूम में दिख रहा है असर
शिक्षकों से मिले फीडबैक के अनुसार, नई तकनीकों के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की भागीदारी और सीखने की प्रेरणा में भारी सुधार हुआ है।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म: व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और मिश्रित (Blended) प्रशिक्षण फॉर्मेट भी विकसित किए जा रहे हैं।
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अनुकूलन: फिनलैंड के मॉडल को सीधे थोपने के बजाय, उसे पंजाब के स्थानीय परिवेश के हिसाब से बदला गया है, ताकि शिक्षक और छात्र इसे आसानी से अपना सकें।
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य सरकारी शिक्षा को इतना मजबूत करना है कि हमारे विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए तैयार रहें। शिक्षकों को विशेषज्ञों की सहायता से ऐसे प्रोजेक्ट डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है जो सीखने को बोझ नहीं बल्कि एक दिलचस्प अनुभव बनाते हैं।”