नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत ने हमारे समाज में नर्सिंग के पेशे को लेकर फैली रूढ़िवादी और गलत धारणाओं पर कड़ा प्रहार किया है। अपनी आगामी थ्रिलर फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर कंगना ने बेहद बेबाकी से जमीनी हकीकत को बयां किया। उन्होंने कहा कि नर्सें हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (Healthcare System) की असली रीढ़ होती हैं, लेकिन इसके बावजूद समाज उन्हें वह सम्मान नहीं देता जिसकी वे हकदार हैं।
कम वेतन, ज्यादा काम और ओछी मानसिकता का शिकार हैं नर्सें
कंगना रनौत ने देश के फ्रंटलाइन वर्कर्स का पक्ष रखते हुए कहा कि नर्सों को न सिर्फ बहुत कम सैलरी मिलती है, बल्कि उनसे जरूरत से ज्यादा काम भी कराया जाता है। समाज की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए उन्होंने फिल्म के एक डायलॉग का हवाला दिया:
“लोग अस्पताल में नर्सों को देखकर टाइमपास के लिए दो-चार बातें करने की कोशिश करते हैं, जो बेहद ओछी मानसिकता को दिखाता है। जब भी अस्पताल का जिक्र होता है, तो सारा श्रेय डॉक्टरों को दे दिया जाता है। लोग भूल जाते हैं कि मरीजों की चौबीसों घंटे देखभाल करने से लेकर अस्पताल के पूरे सिस्टम को चलाने की असली जिम्मेदारी नर्सों, वार्ड बॉयज और चौकीदारों जैसे सपोर्ट स्टाफ की होती है, जिन्हें हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है।”
कामा अस्पताल के जांबाज स्टाफ की अनकही दास्तान है यह फिल्म
कंगना की यह फिल्म मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमलों के दौरान कामा अस्पताल (Cama Hospital) के स्टाफ की अदम्य बहादुरी और साहस की सच्ची कहानी पर आधारित है।
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कंगना का किरदार: इस फिल्म में कंगना खुद एक आम ग्राउंड स्टाफ नर्स की भूमिका निभा रही हैं।
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कहानी का सार: फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आतंकियों के खौफनाक हमले के बीच अस्पताल के इन सीधे-साधे और चुपचाप काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी जान दांव पर लगाकर 400 से ज्यादा मासूम जिंदगियों को बचाया था।
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कसाब के खिलाफ गवाही: कंगना ने बताया कि कामा अस्पताल का यही बहादुर स्टाफ आतंकी अजमल कसाब की पहचान करने और उसे सजा दिलाने में अहम गवाह बना था। भयंकर ट्रॉमा से गुजरने के बाद भी इन वर्कर्स ने देश के प्रति अपना फर्ज निभाया।
पीएम मोदी के शब्दों से प्रेरित है फिल्म का नाम: ‘भारत भाग्य विधाता’
ट्रेलर लॉन्च के दौरान कंगना ने फिल्म के टाइटल को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ‘भारत भाग्य विधाता’ नाम असल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों से प्रेरित है।
साल 2025 में पीएम मोदी ने समाज के अलग-अलग वर्गों को विशेष नाम दिए थे— जैसे दिव्यांगों और विधवाओं की योजना को ‘कल्याणी’, कारीगरों को ‘विश्वकर्मा’ और देश के मेहनतकश मजदूरों व ग्राउंड वर्कर्स को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहा था। फिल्म की टीम को यह बात इतनी पसंद आई कि उन्होंने अस्पताल के इन गुमनाम हीरोज (नर्सों और सपोर्ट स्टाफ) को देश का असली ‘भाग्य विधाता’ मानते हुए इसे अपनी फिल्म का टाइटल बना लिया।
सोच बदलने की एक छोटी सी कोशिश
फिल्म के दमदार और झकझोर देने वाले ट्रेलर को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। कंगना ने उम्मीद जताई है कि इस मार्मिक कहानी को देखने के बाद अगर समाज की सोच में थोड़ा सा भी बदलाव आता है, तो एक कलाकार के तौर पर उनकी पूरी टीम की मेहनत सफल हो जाएगी।