नई दिल्ली: क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल क्यों कहा जाता है, इसका सबसे क्रूर उदाहरण इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में देखने को मिला। जीत की दहलीज़ पर खड़ी टीम इंडिया आखिरी 18 गेंदों में बिखर गई। 45वें ओवर तक मैच पूरी तरह भारत की मुट्ठी में था, लेकिन अंतिम 3 ओवरों में युवा गेंदबाजी आक्रमण की अनुभवहीनता ने पूरा पासा पलट दिया। इंग्लैंड ने 27 रनों से यह अकल्पनीय जीत दर्ज की और इसके साथ ही भारत ने मुकाबला और वनडे सीरीज दोनों गंवा दिए।
45वें ओवर तक ‘ड्राइविंग सीट’ पर था भारत
मैच में एक समय ऐसा था जब कप्तान शुभमन गिल की रणनीति के अनुसार सब कुछ सही चल रहा था। भारतीय स्पिनर्स ने बीच के ओवरों में इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर शिकंजा कस रखा था। 40वें ओवर के बाद जब विकेट धीमा हुआ, तो योजना विपक्षी टीम को 300 रन के अंदर रोकने की थी।
मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने बेहद निराश होकर कहा:
“हम 45वें ओवर तक पूरी तरह से मैच में बने हुए थे। हमारी योजना के मुताबिक सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन आखिरी तीन ओवरों ने हमसे मैच छीन लिया। हमारा युवा पेस अटैक दबाव झेलने में नाकाम रहा।”
डेथ ओवरों का विलेन: 3 ओवर, 62 रन और दिशाहीन गेंदबाजी
भारतीय टीम की हार की स्क्रिप्ट 46वें ओवर से लिखी जानी शुरू हुई। क्रीज पर सेट हो चुके इंग्लिश बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की अनुभवहीनता का जमकर फायदा उठाया:
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प्रसिद्ध कृष्णा: चोट के बाद वापसी कर रहे अनुभवी प्रसिद्ध कृष्णा से यॉर्कर और स्लोअर गेंदों की उम्मीद थी, लेकिन उनकी गेंदबाजी में न तो धार दिखी और न ही सटीक दिशा।
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प्रिंस यादव: मैच की शुरुआत में अच्छी गेंदबाजी करने वाले प्रिंस आखिरी ओवरों में इंग्लैंड के काउंटर-अटैक के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए।
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गुरनूर बराड़: गुरनूर ने अपनी गति से प्रभावित तो किया, लेकिन फुल टॉस और लेंथ गेंदों पर चौके-छक्के खाने के बाद वह अपना नियंत्रण खो बैठे।
इन तीनों गेंदबाजों ने मिलकर आखिरी 18 गेंदों में 62 रन लुटा दिए। फुल टॉस, वाइड और खराब लेंथ गेंदों की इस खैरात ने इंग्लैंड को एक ऐसे मजबूत स्कोर पर पहुंचा दिया, जिसने भारत पर मानसिक दबाव बना दिया।
रोहित शर्मा का जुझारू शतक गया बेकार
धीमी और लगातार टर्न होती पिच पर इस बड़े लक्ष्य का पीछा करना बेहद मुश्किल था। ऐसे में अनुभवी रोहित शर्मा ने एक बार फिर जिम्मेदारी उठाई। रोहित ने विपरीत परिस्थितियों में एक बेहतरीन शतकीय पारी खेलकर यह साबित किया कि उन्हें क्यों दुनिया का सबसे खतरनाक वनडे बल्लेबाज माना जाता है। लेकिन अफसोस, दूसरे छोर से जरूरी सहयोग न मिलने और गेंदबाजों की उस 18 गेंदों की बड़ी चूक के कारण रोहित का यह शानदार शतक भी टीम को जीत नहीं दिला सका।


