जालंधर/फिल्लौर: लुधियाना के एक होटल में काम करने वाली 23 वर्षीय दलित युवती ‘अनु’ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर गुस्सा भड़क गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आह्वान पर सैकड़ों लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मृतका के घर से अंबेडकर चौक तक विशाल विरोध व कैंडल मार्च निकाला।
अंबेडकर चौक पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने मृतका की तस्वीर बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष रखी और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों का गुस्सा स्थानीय पुलिस प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर जमकर फूटा।
“इंसाफ की जगह आरोपियों को बचा रही पुलिस”
प्रदर्शन में शामिल समाजसेवी मनदीप सिंह गोरा और बसपा नेताओं ने कहा कि जिस पुलिस पर कानून व्यवस्था और न्याय की जिम्मेदारी है, वही आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
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24 घंटे की चेतावनी: सैकड़ों लोगों ने एक सुर में पुलिस प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
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पंजाब स्तर पर आंदोलन: चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर मृतका के परिवार को न्याय और हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो इस संघर्ष को राज्य स्तर पर ले जाया जाएगा।
16 जुलाई का घटनाक्रम: चेहरा बुरी तरह से था कुचला
बसपा प्रदेश कमेटी के सदस्य खुशी राम ने जनसभा को संबोधित करते हुए पुलिस जांच पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:
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संदिग्ध परिस्थितियां: 16 जुलाई को शाम साढ़े 6 बजे अनु लुधियाना के ‘ओन होटल’ से काम खत्म कर घर के लिए निकली थी। रात 9 बजे फिल्लौर बस स्टैंड के पास रेलवे लाइनों पर उसकी लाश रहस्यमय हालत में मिली।
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पहचान मिटाने की कोशिश: युवती के कपड़े ठीक थे, लेकिन पहचान छिपाने की नीयत से उसका चेहरा किसी ईंट या पत्थर से बुरी तरह कुचल दिया गया था।
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परिजनों को परेशान करने का आरोप: घटना के 6 दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उल्टा पुलिस परिजनों को बार-बार थाने और डीएसपी दफ्तर बुलाकर मानसिक रूप से परेशान कर रही है।
बसपा नेता ने ऐलान किया कि जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी और प्राथमिकी दर्ज नहीं होती, तब तक परिवार का कोई भी सदस्य किसी पुलिस अधिकारी से मिलने नहीं जाएगा।
पिता का छलका दर्द: “बेटी के चरित्र पर उंगली उठा रही पुलिस”
मृतका के पिता बूटा राम ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि कानून सचमुच अंधा हो चुका है।
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गंभीर आरोप: पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि डीएसपी भरत मसीह ने उन्हें दफ्तर बुलाकर कहा कि उनकी बेटी होटल के सेल्स मैनेजर आकाशदीप के संपर्क में थी।
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चुप कराने की साजिश: पिता का आरोप है कि पुलिस उनकी बेटी के चरित्र पर सवाल उठाकर मामले को दबाने और परिवार को चुप कराने की कोशिश कर रही है।
पीड़ित परिवार ने साफ कर दिया है कि अब जनता का साथ मिलने के बाद वे किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे और अपनी बेटी को न्याय दिलाकर ही रहेंगे।


