नाभा के थूही गांव में ‘जहरीली स्प्रिट’ का कहर: दो बुजुर्गों की मौत, एक की आंखों की रोशनी गई; PGI में जिंदगी-मौत की जंग

नाभा (पटियाला): पंजाब सरकार के नशा विरोधी दावों के बीच नाभा के नजदीकी गांव थूही से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गांव में कथित तौर पर लंबे समय से नशे के रूप में बेची जा रही ‘जहरीली स्प्रिट’ (Spirit) पीने से दो लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद जहां गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है, वहीं स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पिता के बाद स्प्रिट बेचने वाले के बेटे ने भी तोड़ा दम

घटना को लेकर पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों में भारी रोष है। मीडिया से बातचीत के दौरान मृतक 70 वर्षीय बुजुर्ग मेवा सिंह के बेटे जसपाल सिंह और अन्य रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि गांव का ही एक बुजुर्ग, मलकीत सिंह पिछले काफी समय से धड़ल्ले से नशे के तौर पर सस्ती स्प्रिट बेचने का अवैध धंधा कर रहा है। आरोप है कि कोई बाहरी व्यक्ति मलकीत को यह केमिकल सप्लाई करता था।

  • पहली मौत: सोमवार को मेवा सिंह ने मलकीत से स्प्रिट लेकर पी थी, जिसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए नाभा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।

  • दूसरी मौत: हैरान करने वाली बात यह रही कि इस जहरीले नशे को बेचने वाले मलकीत सिंह के अपने बेटे, भरपूर सिंह ने भी सोमवार को बची हुई स्प्रिट पी ली, जिससे उसकी भी मौत हो गई।

सस्ता नशा निगल गया आंखों की रोशनी, PGI में वेंटिलेटर पर रीढ़ की हड्डी

इसी जहरीली स्प्रिट का शिकार हुए गांव के एक अन्य निवासी बलविंदर सिंह की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। बलविंदर सिंह के परिवार (पत्नी और बेटी) ने रोते हुए बताया कि वे रेहड़ी चलाकर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते थे। सस्ता होने के कारण वे पिछले काफी समय से इस स्प्रिट के नशे के आदी हो चुके थे।

सोमवार को इसे पीने के बाद अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली गई और हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले सिविल अस्पताल और फिर गंभीर स्थिति में पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां वे फिलहाल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

पंचायत की चुप्पी और पुलिस के रवैये पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत और पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है:

  1. पंचायत की लापरवाही: गांव में लंबे समय से मौत का यह सामान बिक रहा था, लेकिन पंचायत ने इसकी रोकथाम के लिए कभी कोई ठोस प्रस्ताव (मत्ता) पास नहीं किया।

  2. पुलिस पर पर्दा डालने का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि थाना सदर पुलिस इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही।

पुलिस का पक्ष:

जब इस मामले को लेकर थाना सदर नाभा के प्रभारी (SHO) जसप्रीत सिंह से बात की गई, तो उन्होंने नशा बेचने के आरोपों को नकारते हुए कहा, “हमें अस्पताल से मेवा सिंह की मौत की सूचना मिली थी। मृतक के बेटे ने पुलिस को दिए बयान में मौत का कारण प्राकृतिक (Natural Death) बताया है। फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है। अगर जांच में नशे या स्प्रिट की बात सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

बड़ा सवाल: बयानों के इंतजार में और कितनी मौतें?

पुलिस भले ही तकनीकी तौर पर बयानों का हवाला दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पीड़ित परिवारों ने कैमरे के सामने खुले तौर पर गांव में स्प्रिट माफिया के सक्रिय होने की बात कबूल की है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस केवल लिखित शिकायत के इंतजार में अवैध नशे के सौदागरों को खुली छूट देती रहेगी? अगर स्थानीय प्रशासन और पुलिस समय रहते नहीं जागे, तो पंजाब को नशा मुक्त करने का सपना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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