पंजाब के हकों पर डाका नहीं डालने दूंगा, पानी की एक बूंद भी फालतू नहीं: मुख्यमंत्री भगवंत मान

Punjab

नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नई दिल्ली में एक स्पष्ट और कड़े संदेश में कहा है कि वह पंजाब और पंजाबियों के हितों की रक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को पंजाब के हक छीनने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उत्तरी जोन काउंसिल की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सीएम मान ने हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये राज्य एकजुट होकर पंजाब पर अनुचित दबाव बनाने और उसके संसाधनों में हिस्सेदारी मांगने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे पंजाब सरकार कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि पंजाब के कड़े विरोध के कारण बैठक में कई एजेंडा आइटम स्थगित करने पड़े।

पानी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने हरियाणा की उस मांग को हास्यास्पद बताया जिसमें भाखड़ा मेन लाइन पर मिनी हाइडल प्रोजेक्ट रोकने की बात कही गई थी। एसवाईएल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसका समाधान यमुना-सतलुज लिंक (YSL) के जरिए ही हो सकता है, क्योंकि पंजाब के पास पानी की कमी है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चेनाब नदी को रावी-ब्यास से जोड़कर पानी की समस्या का हल निकाला जा सकता है। इसके अलावा, सीएम मान ने चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा दोहराया और यूटी प्रशासन में पंजाब के अधिकारियों के 60:40 के अनुपात का उल्लंघन करने पर केंद्र की आलोचना की।

मुख्यमंत्री ने पंजाब यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा पिछले 50 सालों से अलग यूनिवर्सिटी चला रहा है, लेकिन अब वह पंजाब यूनिवर्सिटी में अपने कॉलेज जोड़कर पीछे के दरवाजे से घुसने की कोशिश कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मान ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है और हम ही इसकी फंडिंग जारी रखेंगे। उन्होंने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में स्थायी सदस्यता और रोपड़, हरिके व फिरोजपुर हेडवर्क्स के नियंत्रण को लेकर भी पंजाब का पक्ष मजबूती से रखा।

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