खट्टर का टूर प्लानर बना HPSC चेयरमैन! आलोक वर्मा का सच दुनिया के सामने आया

Haryana

दोस्तों, आज का सवाल बहुत बड़ा है! HPSC भर्ती घोटाले में चेयरमैन अलोक वर्मा की पूरी पोल खुल रही है, लेकिन सवाल ये है – ये आदमी आया कहाँ से? कौन है ये बिहार से ‘इंपोर्ट’ किया गया अफसर? और सबसे बड़ा राज़ – क्या ये सिर्फ संयोग है कि अलोक वर्मा मनोहर लाल खट्टर के पहले कार्यकाल में उनके एड-कैंप (टूर) थे? यानी मुख्यमंत्री के टूर प्लान करने वाले, उनके साथ घूमने-फिरने वाले, हर जगह साथ रहने वाले अफसर!

टूर प्लानर बना HPSC चेयरमैन!

2014 में मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल शुरू हुआ। उस समय अलोक वर्मा एक सीनियर IFS अधिकारी थे – 1989 बैच के, हरियाणा कैडर में। लेकिन वो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में थे, न कि कोई बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट।

फिर क्या हुआ? खट्टर सरकार ने उन्हें ADC (Tour) यानी एड-कैंप टूर का चार्ज दिया। मतलब? मुख्यमंत्री के हर टूर, हर दौरे, हर प्रोग्राम की प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स, सिक्योरिटी, गेस्ट लिस्ट – सब कुछ अलोक वर्मा संभालते थे। वो खट्टर के साथ हर जगह रहते थे – मीटिंग्स में, रैलियों में, टूर पर। ये पोस्ट बहुत पावरफुल होती है, क्योंकि मुख्यमंत्री का सबसे करीबी आदमी बन जाता है।दोस्तों, ये कोई छोटी पोस्ट नहीं थी। ये वो रिश्ता था जो सालों तक चला। अलोक वर्मा ने VRS (वॉलंटरी रिटायरमेंट) लिया IFS से, और सीधे HPSC चेयरमैन बन गए। शपथ राज्यपाल ने दिलाई, लेकिन सिफारिश? पूरी तरह खट्टर सरकार की!

खट्टर ने क्यों चुना बिहार वाला?

“अब सवाल उठता है – क्या ये मेरिट पर हुआ? या ये ‘खट्टर का करीबी’ होने का फायदा था?

  • अलोक वर्मा बिहार के भागलपुर के हैं, हरियाणा कैडर में थे, लेकिन लोकल हरियाणवी नहीं।
  • कांग्रेस ने तब भी विरोध किया – ‘आउटसाइडर’ को क्यों HPSC चेयरमैन बनाया?
  • आज वही अलोक वर्मा HPSC में भर्तियों में अनियमितताएं कर रहे हैं – पेपर लीक, नेपोटिज्म, आउटसाइडर्स को फायदा।
  • युवा सड़कों पर हैं, रोहतक में प्रोटेस्ट हो रहे हैं। और सरकार चुप है। क्यों? क्योंकि ये उनका अपना आदमी है!

दोस्तों, अगर कोई मुख्यमंत्री का पुराना टूर वाला अफसर अचानक पब्लिक सर्विस कमीशन का बॉस बन जाए, तो क्या उम्मीद करोगे? फेयर भर्ती? या फेवरिटिज्म? ये सिस्टम का अपमान है, हरियाणा के युवाओं का अपमान है!सोचो – अगर आपका बॉस आपको सालों तक साथ रखे, टूर पर ले जाए, और फिर आपको इतना बड़ा पद दे दे, तो क्या वो आपके खिलाफ बोलेगा? नहीं ना! इसलिए अलोक वर्मा आज भी कुर्सी पर बैठे हैं, भले ही विवादों में घिरे हों।

कमेंट्स में बताओ – क्या मनोहर लाल खट्टर को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अपने ‘टूर वाले’ को HPSC चेयरमैन क्यों बनाया? क्या ये फेयर है?”

“दोस्तों, ये कहानी सिर्फ अलोक वर्मा की नहीं, बल्कि सिस्टम की सच्चाई है।

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