Punjab Desk: पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू द्वारा पार्टी छोड़ने के ऐलान और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर लगाए गए तीखे आरोपों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है।
नवजोत कौर सिद्धू के गंभीर आरोप
नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने पार्टी नेतृत्व, विशेषकर राजा वड़िंग पर कड़ा प्रहार करते हुए निम्नलिखित आरोप लगाए:
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भ्रष्टाचार और अयोग्यता: उन्होंने राजा वड़िंग को अब तक का सबसे अयोग्य और भ्रष्ट अध्यक्ष करार दिया।
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निजी स्वार्थ: सिद्धू का दावा है कि वड़िंग ने निजी लाभ के लिए संगठन को कमजोर किया और गलत लोगों को ऊंचे पदों पर बैठाया।
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साजिश का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चुनावी क्षेत्र को कमजोर करने के लिए उनके खिलाफ अंदरूनी तौर पर काम किया गया।
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सबूतों की चेतावनी: सिद्धू ने कहा कि उनके पास नेतृत्व को बेनकाब करने के सबूत हैं, हालांकि वे उनमें रुचि नहीं रखतीं।
राजा वड़िंग का पलटवार: “इलाज की जरूरत है”
सिद्धू के आरोपों का जवाब देते हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सिद्धू के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें तो पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है। वड़िंग ने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि वे सिद्धू का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लग रही और उन्हें “इलाज की जरूरत” है।
संगठन के भीतर बढ़ता संकट
नवजोत कौर सिद्धू ने अपने बयान में केवल वड़िंग ही नहीं, बल्कि अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जो नेता खुलकर आलाकमान को चुनौती देते रहे, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में ईमानदार कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है और केवल चापलूसों को तवज्जो दी जा रही है।
