केसरिया रंग और बलिदान का संदेश: क्यों पंजाब के दौरों पर बार-बार सिख प्रतीकों के साथ दिख रहे CM सैनी?

Haryana

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन दिनों पंजाब की सियासत में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में उनके 8 पंजाब दौरे और वहां के नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकी इस बात का संकेत है कि भाजपा पंजाब में अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए सैनी को ‘फ्रंट फेस’ के रूप में पेश कर रही है।

केसरिया पगड़ी और सांस्कृतिक जुड़ाव

अपने पंजाब दौरों के दौरान सीएम सैनी अक्सर केसरिया पगड़ी में नजर आते हैं, जो सिख पंथ में साहस, बलिदान और त्याग का प्रतीक है।

  • धार्मिक महत्व: केसरिया रंग गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के बलिदान तथा खालसा पंथ के ‘निशान साहिब’ से जुड़ा है।

  • सांस्कृतिक संदेश: हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर लोहड़ी के पर्व पर पंजाब के नेताओं को आमंत्रित करना और सार्वजनिक मंचों पर पंजाबी में भाषण देना, पंजाब के लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की एक कोशिश मानी जा रही है। वह अक्सर पंजाब को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए ‘खून के रिश्ते’ की दुहाई देते हैं।

2027 विधानसभा चुनाव और भाजपा की रणनीति

पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे देखते हुए भाजपा ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है:

  1. वोट बैंक पर फोकस: भाजपा पंजाब में विशेष रूप से OBC (पिछड़ा वर्ग) और गैर-सिख वोटरों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है।

  2. सैनिक मॉडल: हरियाणा में सफलतापूर्वक सत्ता संभालने वाले नायब सैनी को पंजाब में भाजपा के प्रचार का मुख्य चेहरा बनाया जा रहा है ताकि पड़ोसी राज्य के मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके।

  3. बजट और विकास: हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने के बाद सैनी की छवि एक ‘विकास पुरुष’ के रूप में और मजबूत हुई है, जिसका लाभ पार्टी पंजाब में उठाना चाहती है।

मुख्यमंत्री सैनी का यह ‘पंजाब प्रेम’ महज शिष्टाचार है या आने वाले चुनावों के लिए एक सोची-समझी राजनीतिक चाल, यह तो समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, चंडीगढ़ से लेकर अमृतसर तक उनके दौरों ने सियासी हलचल तेज कर दी है।

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