Punjab Desk: सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपी पवन बिश्नोई को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए नियमित जमानत (Regular Bail) दे दी है। 29 मई 2022 को मानसा में हुई मूसेवाला की हत्या के बाद से पवन बिश्नोई पुलिस की रडार पर था और उसे साजिश का एक अहम हिस्सा माना जा रहा था। हालांकि, अब ट्रायल जारी रहने तक वह जेल से बाहर रह सकेगा।
क्या थे आरोप: ‘बोलेरो’ गाड़ी और गोल्डी बरार से कनेक्शन
पंजाब पुलिस और जांच एजेंसियों के मुताबिक, पवन बिश्नोई का सीधा संबंध लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार गैंग से है। उन पर आरोप था कि:
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कनाडा में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बरार ने पवन को फोन कर शूटरों के लिए वाहन का इंतजाम करने को कहा था।
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पवन ने ही वह ‘बोलेरो’ गाड़ी उपलब्ध कराई थी, जिसका इस्तेमाल कर शूटरों ने सिद्धू मूसेवाला का पीछा किया और उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें
पवन बिश्नोई के वकील अभय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को केवल ‘कथित फोन कॉल’ के आधार पर जेल में रखा गया है। उन्होंने मजबूती से कहा कि पवन के खिलाफ ऐसे कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं हैं जो उसे सीधे तौर पर हत्या की साजिश से जोड़ सकें। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि इस स्तर पर जमानत दी जा सकती है।
केस पर क्या होगा असर?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पवन बिश्नोई को जमानत मिलना उन लोगों के लिए भावुक रूप से एक झटका है जो मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, तकनीकी रूप से जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत आरोपी ट्रायल के दौरान बाहर रह सकता है।
इंसाफ की जंग और पुलिस की चुनौतियां
सिद्धू मूसेवाला के माता-पिता अभी भी मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और सख्त सजा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के सामने चुनौती यह होगी कि वे ट्रायल कोर्ट में और भी पुख्ता सबूत पेश करें। फिलहाल, पुलिस गोल्डी बरार के प्रत्यर्पण और अन्य फरार अपराधियों को पकड़ने के प्रयासों में जुटी हुई है।