Punjab Desk: चंडीगढ़ में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान खाद्य पदार्थों, विशेषकर दूध और पनीर में हो रही मिलावट का मुद्दा प्रमुखता से उठा। आम आदमी पार्टी के विधायक बलकार सिंह सिद्धू द्वारा पूछे गए सवाल पर चर्चा करते हुए कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि हालांकि वर्तमान खाद्य सुरक्षा कानून केंद्र सरकार का है, लेकिन पंजाब सरकार विशेषज्ञों का एक समूह बनाकर इस कानून में संशोधन करने और सख्त सजा का प्रावधान करने की दिशा में देश का नेतृत्व कर सकती है। अरोड़ा ने चिंता जताई कि 1954 का पुराना एक्ट काफी सख्त था, जिसे 2006 में यूपीए सरकार ने संशोधित कर काफी नरम कर दिया था।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और सैंपलिंग के आंकड़े
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सदन को जानकारी दी कि विभाग मिलावट रोकने के लिए लगातार सैंपलिंग कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 1162 सैंपल भरे गए, जिनमें से 88 पूरी तरह फेल रहे और 327 सैंपल ‘सब-स्टैंडर्ड’ यानी घटिया गुणवत्ता के पाए गए। इसी प्रकार, वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में भी वृद्धि देखी गई, जहां 144 सैंपल फेल हुए और 476 सब-स्टैंडर्ड पकड़े गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो सैंपल फेल होते हैं, उनके खिलाफ अदालत में केस चलाया जाता है, जबकि घटिया गुणवत्ता वाले केसों की सुनवाई एडीसी स्तर पर की जाती है।
पड़ोसी राज्यों से आवक और लैब रिपोर्ट पर सवाल
चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि त्योहारी सीजन में पड़ोसी राज्यों से भारी मात्रा में मिलावटी पनीर और देसी घी पंजाब में लाया जाता है, जिस पर सरकार पैनी नजर रख रही है। विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी मिलावट करने वालों के लिए कठोरतम सजा की वकालत की। वहीं, विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने टेस्टिंग लैब्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लैब की रिपोर्ट की भाषा बहुत कठिन होती है; वे केवल यह बता देते हैं कि सैंपल ‘सब-स्टैंडर्ड’ है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं करते कि उसमें असल में क्या मिलाया गया है और वह सेहत के लिए कितना घातक है।