चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को जड़ से मिटाने के लिए एक ऐतिहासिक विधेयक सदन में पेश किया। इस कानून का उद्देश्य राज्य में धार्मिक पवित्रता बनाए रखना और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
विधेयक की मुख्य विशेषताएं
यह विधेयक मौजूदा ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ को और अधिक सशक्त बनाता है:
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कठोर सजा: अब बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
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समयबद्ध जांच: कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस कानून के तहत जांच एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।
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उच्च स्तरीय निगरानी: पूरी जांच प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में होगी, जिससे किसी भी स्तर पर ढिलाई की कोई गुंजाइश न रहे।
विपक्ष की मांग और सरकार का रुख
सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से पिछले वर्ष गठित ‘सेलेक्ट कमेटी’ की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सत्र की अवधि बढ़ाने का भी सुझाव दिया। इसके जवाब में स्पीकर ने आश्वासन दिया कि समिति अपना काम कर रही है और रिपोर्ट जल्द ही सदन के पटल पर रखी जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष से अपील की कि वे वॉकआउट के बजाय इस अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर स्वस्थ चर्चा में सहभागी बनें।
सामाजिक सौहार्द का संदेश
मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि समाज में धार्मिक सौहार्द और संतुलन बनाए रखने के लिए लाया गया है। सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बेअदबी की बढ़ती घटनाओं ने सामाजिक आक्रोश और तनाव को जन्म दिया है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अपरिहार्य हो गया था।
सरकार को उम्मीद है कि प्रस्तावित कानून न केवल भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाएगा, बल्कि अपराधियों के मन में डर पैदा कर धार्मिक ग्रंथों के सम्मान की रक्षा भी करेगा।