चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने बताया कि प्रदेश में 45,000 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण और मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
ठेकेदारों की बढ़ेगी जवाबदेही: 5 साल की गारंटी अनिवार्य
सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक कड़ा नियम लागू किया है। अब सड़क निर्माण के बाद अगले 5 वर्षों तक रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। यदि इस अवधि में सड़क टूटती है, तो ठेकेदार को अपने खर्चे पर उसकी मरम्मत करनी होगी।
गुणवत्ता पर ‘तीसरी आँख’ का पहरा
भ्रष्टाचार और लापरवाही को रोकने के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय निगरानी प्रणाली तैयार की है:
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मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वॉड: निर्माण कार्यों की सीधी निगरानी।
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क्वालिटी कंट्रोल सेल: सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच।
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औचक निरीक्षण: विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जमीनी स्तर पर अचानक चेकिंग।
FDR तकनीक: घरों के लेवल पर रहेगी सड़क
पंजाब में पहली बार ‘फुल डेप्थ रेक्लीमेशन’ (FDR) जैसी आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
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वर्तमान स्थिति: इस तकनीक से फिलहाल 540 किलोमीटर लिंक सड़कों का निर्माण हो रहा है।
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फायदा: इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सड़क की ऊंचाई घरों के स्तर के बराबर रहती है। इससे गांवों में घरों के भीतर पानी घुसने (जलभराव) की समस्या खत्म हो जाएगी।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’
कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद विकास कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सरकार का संदेश साफ है—निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बेमौसम बारिश के कारण कार्यों में जो थोड़ी देरी हुई थी, उसे अब दुगनी गति से काम करके कवर किया जा रहा है।
निष्कर्ष: 45,000 किलोमीटर सड़कों का यह जाल न केवल पंजाब के गांवों को शहरों से बेहतर तरीके से जोड़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई रफ्तार देगा।