Punjab Desk: पंजाब के समाना में पिछले डेढ़ साल से भी अधिक समय से चल रहा एक अनोखा और साहसी आंदोलन आज समाप्त हो गया। बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर 400 फुट ऊंचे मोबाइल टावर पर डटे कार्यकर्ता गुरजीत सिंह खालसा शुक्रवार सुबह सुरक्षित नीचे उतर आए।
560 दिनों का लंबा संघर्ष
43 वर्षीय गुरजीत सिंह खालसा 12 अक्टूबर 2024 को पटियाला जिले के समाना में मोबाइल टावर पर चढ़े थे। उनकी केवल एक ही मांग थी—गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त से सख्त कानून बनाए। टावर पर रहने के दौरान उन्हें रस्सियों की मदद से भोजन और जरूरी सामान पहुँचाया जाता था।
नया कानून बना आंदोलन की सफलता का आधार
गुरजीत सिंह खालसा का यह आंदोलन तब रंग लाया जब पंजाब सरकार ने हाल ही में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया। इस नए और कड़े कानून के तहत:
-
बेअदबी के दोषियों को अब आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा दी जाएगी।
-
साथ ही, 25 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। यह विधेयक 13 अप्रैल को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसे राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब लागू कर दिया गया है।
सुरक्षित वापसी और भव्य स्वागत
शुक्रवार सुबह जब खालसा टावर से नीचे उतरे, तो वहां मौजूद समर्थकों ने ‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों और फूलों की बारिश के साथ उनका स्वागत किया। उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन ने सेना और दमकल विभाग की मदद से कड़े इंतजाम किए थे। नीचे उतरते ही उन्हें तुरंत मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया।