पंजाब में प्री-SIR वोटर मैपिंग का काम तेज: 84% से अधिक मतदाताओं का डेटा अपडेट, मानसा जिला सबसे आगे

चंडीगढ़। पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू होने से पहले ‘प्री-SIR वोटर मैपिंग’ का काम युद्ध स्तर पर जारी है। राज्य चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में अब तक 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। कई जिलों ने तो 90 फीसदी से अधिक का आंकड़ा पार कर लिया है, हालांकि कुछ बड़े शहरों में रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है।

मानसा जिला टॉप पर, मोहाली सबसे पीछे

वोटर मैपिंग के मामले में अलग-अलग जिलों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा है:

  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिले: पूरे राज्य में मानसा जिला 93.72% मैपिंग के साथ पहले पायदान पर है। इसके बाद तरनतारन (93.01%), श्री मुक्तसर साहिब (92.38%) और बरनाला (91.29%) का नंबर आता है। वहीं मालेरकोटला, नवांशहर, अमृतसर, होशियारपुर और मोगा में भी 87% से 89% के बीच काम हो चुका है।

  • धीमी रफ्तार वाले जिले: विकास की दौड़ में आगे रहने वाले एसएएस नगर (मोहाली) में मैपिंग की रफ्तार सबसे सुस्त है, जहां अब तक केवल 65.88% काम ही हुआ है। इसके अलावा लुधियाना भी पिछड़ता दिख रहा है, जहां 73.64% मैपिंग ही दर्ज की गई है।

2 करोड़ से अधिक मतदाताओं का डेटा हो रहा सटीक

इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के रिकॉर्ड को पूरी तरह सटीक और त्रुटिहीन बनाना है। इसके तहत साल 2002-2004 की पुरानी वोटर लिस्ट का मिलान वर्तमान मतदाताओं के डेटा से किया जा रहा है।

राज्य के कुल 2,14,59,201 मतदाताओं में से अब तक 1,80,32,126 लोगों का मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा चुका है। बाकी बचे करीब 34 लाख से अधिक मतदाताओं के डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है।

सुस्ती दूर करने के लिए BLO टीमों में फेरबदल

मैपिंग के काम को गति देने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य में कुल 24,453 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) इस काम में जुटे हैं। कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी कारणों, तबादलों (ट्रांसफर) और लापरवाही की वजह से काम प्रभावित हो रहा था। इसे देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में बीएलओ टीमों को री-शफल (बदलाव) किया है ताकि काम समय पर पूरा हो सके।

अधिकारियों (ERO) को रोजाना समीक्षा के आदेश

इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) को सख्त हिदायत दी गई है कि वे रोजाना के काम की खुद निगरानी करें और बीएलओ टीमों के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं। खासकर शहरी इलाकों और ऊंची सोसायटियों (हाईराइज बिल्डिंग्स) में काम को तेज करने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) और स्थानीय समितियों की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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