पंजाब ने केंद्र से मांगा विशेष आर्थिक पैकेज, सीमा पर तनाव और बाढ़ के नुकसान की भरपाई के लिए ₹12,905 करोड़ की मदद और अतिरिक्त उधारी की मांग

Punjab

चंडीगढ़नई दिल्ली : वर्ष 2025 के दौरान भारत–पाकिस्तान सीमा पर उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों तथा इसके बाद दशकों में आई भीषण बाढ़ से राज्य को हुई भारी क्षति का हवाला देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता और एक विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान करने की जोरदार मांग की है।
आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026–27 के लिए राज्य की प्रमुख वित्तीय आवश्यकताओं और नीतिगत मांगों को रेखांकित करते हुए एक विस्तृत मांग-पत्र सौंपा। एडवोकेट चीमा ने इस बात पर बल दिया कि भौगोलिक दृष्टि से देश की रक्षा की अग्रिम पंक्ति में स्थित होने के कारण पंजाब को सीमाओं पर बढ़े सुरक्षा तनाव का सामना करना पड़ा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इसके पश्चात आई बाढ़ को गृह मंत्रालय द्वारा गंभीर आपदा घोषित किया था।
वित्त मंत्री ने बताया कि बाढ़ से 2,300 से अधिक गांव और 20,000 परिवार गंभीर रूप से प्रभावित हुए तथा प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 12,905 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस बड़े पैमाने पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए उन्होंने वित्त वर्ष 2025–26 हेतु राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जी एस डी पी ) के 1 प्रतिशत के बराबर एकमुश्त अतिरिक्त उधारी सीमा की अनुमति मांगी। इसके लिए उन्होंने एफआरबीएम अधिनियम के उन प्रावधानों का हवाला दिया, जो प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा संकटों के दौरान विशेष छूट की अनुमति देते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गतिविधियों को देखते हुए राज्य के सुरक्षा बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पुलिस बल के आधुनिकीकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सुदृढ़ करने तथा सीमा पार खतरों और नशीले पदार्थों की तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उन्नत एंटी-ड्रोन तकनीक हेतु 1,000 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय सहायता की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण उठाए जा रहे अतिरिक्त सुरक्षा बोझ को सहायता के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी रियायत के तौर पर—यह सहकारी संघवाद का प्रतीक होना चाहिए।
कृषि संकट और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब के योगदान का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने लंबित फंडों, विशेषकर ग्रामीण विकास फंड (आर डी एफ ) का मुद्दा उठाया। उन्होंने जून 2025 तक के कुल 7,757 करोड़ रुपये के बकाया आरडीएफ फंड को तुरंत जारी करने की अपील की और कहा कि ये फंड ग्रामीण सड़कों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसके साथ ही टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और भूजल संरक्षण के उद्देश्य से उन्होंने धान विविधीकरण के लिए विशेष बजट आवंटन का प्रस्ताव रखा तथा किसानों में व्यवहारिक परिवर्तन लाने के लिए मौजूदा प्रोत्साहन को अपर्याप्त बताते हुए इसे 15,000 रुपये प्रति एकड़ तक बढ़ाने की मांग की।
वित्त मंत्री ने जीएसटी 2.0 सुधारों के बाद पंजाब को हुए भारी राजस्व नुकसान की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि राज्य को लगभग 6,000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व घाटा हो रहा है, जो राज्य की अपनी कर राजस्व प्राप्तियों का लगभग 44 प्रतिशत है। उन्होंने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ऐसे राज्यों हेतु एक अनुमानित जीएसटी स्थिरीकरण या मुआवजा तंत्र स्थापित करने की पुरजोर वकालत की।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने मनरेगा योजना में प्रस्तावित बदलावों का कड़ा विरोध किया और कहा कि नया ढांचा रोजगार गारंटी को कमजोर करता है तथा राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025–26 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रारंभ में स्वीकृत 452.78 करोड़ रुपये की राशि को घटाकर 252 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने आवश्यक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मूल आवंटन को बहाल करने की मांग की। अंत में, उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय बजट सुरक्षा और जलवायु संकट—दोनों से जूझ रहे सीमावर्ती राज्य पंजाब की विशिष्ट चुनौतियों को समझते हुए सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करेगा।

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