पंजाब सरकार की बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: ‘प्रोजेक्ट जीवनज्योत 2.0’ के तहत 1000 से अधिक बच्चे रेस्क्यू

Punjab

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य से बाल भिक्षावृत्ति (Child Begging) जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए पूरी गंभीरता से जुटी हुई है। सरकार ने बच्चों का शोषण करने वालों और उनसे भीख मंगवाने वाले तत्वों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने इस अभियान की सफलता साझा करते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में इस समय एक विशेष मुहिम चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य हर बच्चे के हाथ में कटोरे के बजाय कलम थमाना है।

डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि हाल ही में राज्यभर के चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर दो दिनों तक सघन छापेमारी की गई। इस विशेष कार्रवाई के दौरान कुल 31 बच्चों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। इनमें से 4 बच्चों के दस्तावेजों की पुष्टि के बाद उन्हें तुरंत उनके माता-पिता को सौंप दिया गया, जबकि 27 बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए अस्थायी रूप से सरकारी बाल गृहों में स्थानांतरित किया गया है, जहाँ उनकी पहचान के सत्यापन के बाद आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि सरकार का ‘प्रोजेक्ट जीवनज्योत 2.0’ इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक कुल 1,023 बच्चों को भीख मांगने के दलदल से बाहर निकाला जा चुका है। सरकार केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि इन बच्चों के समग्र विकास के लिए उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 349 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया है, 38 बच्चों को आर्थिक सहायता के लिए स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा गया है, 13 बच्चों को आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है और 9 छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण दिया जा रहा है।

डॉ. बलजीत कौर ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने आम जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि सड़कों पर बच्चों को दान देकर इस बुराई को बढ़ावा न दें। यदि कहीं भी कोई बच्चा भीख मांगता दिखाई दे, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर इसकी सूचना दें, ताकि शासन-प्रशासन मिलकर उन बच्चों को एक गरिमामय जीवन दे सके।

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