पानीपत: सरकारी अस्पताल के सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर को सुनियोजित तरीके से हनीट्रैप में फंसाने और लाखों रुपये की फिरौती मांगने के मामले में आरोपित महिला वकील को अदालत से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश चौधरी की अदालत ने आरोपित की तीसरी जमानत याचिका को भी सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा- “चालान पेश होना जमानत का आधार नहीं”
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश किया जा चुका है। साथ ही, आरोपित की सगाई टूटने का हवाला देकर राहत की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को अपर्याप्त माना। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल चालान पेश हो जाने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अभी मामले में आरोप (Charges) तय होने और गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, ऐसे में जमानत देना गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला किसी फिल्मी साजिश से कम नहीं है। शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर को फंसाने के लिए एक खतरनाक जाल बुना था:
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दोस्ती और नशीला पदार्थ: पहले अधिकारी से जान-पहचान बढ़ाई गई और फिर झांसे में लेकर एक फ्लैट पर बुलाया गया। आरोप है कि वहां कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़ित को पिला दिया गया।
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वीडियो और ब्लैकमेलिंग: नशीली हालत का फायदा उठाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए। इसके बाद झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 11 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी गई।
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समझौता और गिरफ्तारी: काफी दबाव के बाद सौदा 4 लाख रुपये में तय हुआ। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 7 जुलाई को ‘पुराना औद्योगिक थाना’ पुलिस ने केस दर्ज कर तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अभियोजन पक्ष का कड़ा विरोध
सरकारी वकील ने जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित संगठित अपराध है। आरोपित ने अपनी पेशेवर स्थिति (वकील) का दुरुपयोग करते हुए एक निर्दोष व्यक्ति को ब्लैकमेल किया। अभियोजन ने आशंका जताई कि यदि आरोपित बाहर आती है, तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण गवाहों पर दबाव बना सकती है।
