रोहतक: वर्षों पहले रद्द हुए रोडवेज बसों के परमिटों को फिर से चालू करने की योजना फाइलों में ही दबी नजर आ रही है। आसपास के राज्यों से अनुमति न मिलने के कारण रिन्यूअल की प्रक्रिया अधूरी है, जिसका सीधा खामियाजा हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
क्यों रुके हैं परमिट?
साल 2018 में बसों की किल्लत और दूसरे राज्यों को टैक्स अदायगी में हुई देरी की वजह से 14 महत्वपूर्ण मार्गों के परमिट रद्द कर दिए गए थे। करीब 6 महीने पहले इन रूटों को फिर से बहाल करने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब और राजस्थान की सरकारों के साथ पत्राचार शुरू किया गया था। विभाग ने 15 फरवरी तक यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन टैक्स विवाद और अन्य तकनीकी कारणों से पड़ोसी राज्यों ने अभी तक हरी झंडी नहीं दी है।
यात्रियों को भारी नुकसान
रोडवेज विभाग की इस सुस्त रफ्तार का असर आम जनता पर पड़ रहा है:
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इन रूटों के बहाल होने से प्रतिदिन 3 से 4 हजार यात्रियों को सीधा लाभ मिल सकता था।
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हैरानी की बात यह है कि यूपी के बड़ौत डिपो ने दो महीने पहले खुद रोहतक तक बस चलाने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
आंदोलन की चेतावनी
रोडवेज कर्मचारी संगठनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की गलत नीतियों और कमजोर पैरवी के कारण परमिट बहाल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मार्गों पर बसों का संचालन शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
