चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने आज (सोमवार) विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा शनिवार को कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ‘जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026’ को सदन में पेश कर पारित करवाना है। हालांकि, विधानसभा में बहुमत के कारण बिल पारित होना लगभग तय है, लेकिन इसे कानून बनाने की राह में राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
विवादास्पद प्रावधान और कानूनी पेंच
इस प्रस्तावित बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के दोषियों के लिए 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 5 से 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। समस्या यह है कि ये प्रावधान केंद्रीय कानूनों से सीधे टकराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल इसे मंजूरी देने के बजाय राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेज सकते हैं, जबकि राज्य सरकार का तर्क है कि यह एक ‘स्टेट बिल’ है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष का तीखा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह राजा वड़िंग ने इस विशेष सत्र को सरकार का “राजनीतिक नाटक” करार दिया है। वड़िंग ने आरोप लगाया कि:
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सरकार पिछले चार वर्षों में बेअदबी के किसी भी दोषी को सजा दिलाने में विफल रही है।
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सरकार अपनी नाकामी छुपाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार विशेष सत्र बुलाती है।
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बिल लाने से पहले सरकार ने किसी भी विद्वान या कानूनी विशेषज्ञ से चर्चा नहीं की है।
इतिहास में पहले भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं ऐसे बिल
धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़े बिलों का पुराना विवादित इतिहास रहा है:
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2016 का बिल: राष्ट्रपति ने इसे यह कहते हुए लौटा दिया था कि सभी धर्मों के ग्रंथों के अपमान पर सजा का प्रावधान एक जैसा होना चाहिए, न कि अलग-अलग।
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2018 का बिल: सरकार ने संशोधन कर इसमें सभी धर्मों को शामिल किया, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी इसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी है।
अब देखना यह होगा कि 2026 का यह नया बिल कानूनी बाधाओं को पार कर पाता है या पुराने बिलों की तरह ही फाइलों में उलझकर रह जाता है।