चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र आज सोमवार को शुरू हो रहा है। इस महत्वपूर्ण सत्र की शुरुआत से पहले विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने अपनी पत्नी के साथ मोहाली स्थित गुरुद्वारा श्री अंब साहिब में मत्था टेका और प्रदेश की सुख-शांति व न्याय के लिए अरदास की। इस अवसर पर उन्होंने खालसा पंथ के स्थापना दिवस की भी सभी को हार्दिक बधाई दी।
न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तस्वीरें साझा करते हुए स्पीकर संधवां ने इसे एक ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया। उन्होंने लिखा, “आज पंजाब विधानसभा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। गुरु साहिब के अपमान जैसे संवेदनशील मामलों पर सख्त कानून बनाकर दोषियों को सजा सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।” उन्होंने प्रार्थना की कि गुरु साहिब उन्हें हमेशा सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
‘जगत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2026’ पर टिकी निगाहें
आज के विशेष सत्र में पंजाब सरकार बहुप्रतीक्षित ‘जगत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2026’ पेश करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी गई थी।
इस कानून के पीछे का मुख्य उद्देश्य पिछले एक दशक में सामने आई श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान की लगभग 600 घटनाओं के दोषियों को कड़ी सजा देना है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इन घटनाओं के खिलाफ एक कड़ा और प्रभावी कानून समय की मांग है।
क्या हैं चुनौतियां?
विधानसभा में सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए इस बिल के पारित होने में कोई बड़ी बाधा नहीं दिख रही है। हालांकि, असली चुनौती इसके बाद शुरू होगी। इस बिल को राज्यपाल और अंततः राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है, क्योंकि पूर्व में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से संबंधित ऐसे प्रयास कानूनी और संवैधानिक पेच फंसने के कारण लंबे समय तक लंबित रहे हैं।