चंडीगढ़। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) चंडीगढ़ के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने गॉलब्लैडर (पित्ताशय) के कैंसर की शुरुआती पहचान को लेकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान की टीम ने एक अनूठा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो अल्ट्रासाउंड तस्वीरों (इमेजेस) का विश्लेषण करके कैंसर की शुरुआती स्टेज में ही पहचान कर सकता है। इस महत्वपूर्ण शोध को मशहूर अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘The Lancet Regional Health – Southeast Asia’ में जगह मिली है।
उत्तर भारत में महिलाओं के लिए बड़ा खतरा है गॉलब्लैडर कैंसर
रेडियोडायग्नोसिस एंड इमेजिंग विभाग के डॉ. पंकज गुप्ता के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में कुछ बेहद चिंताजनक और जरूरी बातें सामने आई हैं:
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तेजी से बढ़ते मामले: उत्तर भारत में, खासकर महिलाओं में, गॉलब्लैडर कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
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गॉल स्टोन है मुख्य वजह: विशेषज्ञों के मुताबिक, गॉलब्लैडर में होने वाली पथरी (गॉल स्टोन) इस जानलेवा बीमारी का एक बड़ा कारण है।
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देरी से पता चलना: इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मरीजों में इसका पता ‘एडवांस स्टेज’ (अंतिम चरणों) में चलता है, जिसके कारण इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है।
कैसे काम करती है पीजीआई की यह नई AI तकनीक?
यह नया AI मॉडल बाजार में मौजूद सामान्य एआई सिस्टम से काफी अलग और आधुनिक है:
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मल्टीपल इमेज एनालिसिस: जहां आम एआई मॉडल केवल एक तस्वीर को स्कैन करते हैं, वहीं पीजीआई की यह तकनीक मरीज की कई अल्ट्रासाउंड इमेजेस को एक साथ देखकर कैंसर या नॉन-कैंसर होने की सटीक संभावना बताती है।
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पारदर्शिता (Transparency): यह सिस्टम डॉक्टरों को स्क्रीन पर यह भी दिखाता है कि उसने इमेज के किस खास हिस्से को देखकर यह निष्कर्ष निकाला है। इससे डॉक्टरों को रिपोर्ट समझने और सही इलाज तय करने में बड़ी मदद मिलेगी।
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए संजीवनी
इस सफलता पर डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि अल्ट्रासाउंड एक बेहद सस्ता और हर जगह आसानी से उपलब्ध होने वाला टेस्ट है, लेकिन शुरुआती स्तर पर कैंसर को पकड़ने के लिए बहुत अनुभवी डॉक्टरों की जरूरत होती है। ऐसे में यह AI सिस्टम एक गाइड की तरह काम करेगा। यह तकनीक उन ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के लिए वरदान साबित होगी, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों (रेडियोलॉजिस्ट) की कमी है।
चार अस्पतालों में ट्रायल सफल, डॉक्टरों के लिए ऐप मुफ्त
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सफल परीक्षण: पीजीआई की टीम ने इस मॉडल का परीक्षण उत्तर भारत के चार अलग-अलग अस्पतालों के मरीजों पर किया, जहां इसके नतीजे बेहद सकारात्मक रहे।
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मुफ्त कंप्यूटर एप्लिकेशन: टीम में शामिल कंप्यूटर वैज्ञानिक कार्तिक बोस ने डॉक्टरों की देखरेख में एक बेहद आसान कंप्यूटर ऐप तैयार किया है। देश का कोई भी डॉक्टर या रिसर्चर इस ऐप का इस्तेमाल मुफ्त में कर सकेगा।
अगला कदम: पीजीआई की टीम अब इस तकनीक को बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल में ले जाने की तैयारी कर रही है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि भविष्य में इसे रूटीन अल्ट्रासाउंड का हिस्सा बना दिया जाएगा, जिससे समय रहते गॉलब्लैडर कैंसर की पहचान कर हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।