हिसार: हिसार में महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष ‘सांझा संघर्ष समिति’ द्वारा पिछले 40 दिनों से चलाए जा रहे आंदोलन का बड़ा और सकारात्मक असर देखने को मिला है। कर्मचारियों के लगातार जारी संघर्ष और धरने के आगे झुकते हुए प्रशासन ने उनकी कई वर्षों से लंबित पड़ी मुख्य मांगों को आखिरकार स्वीकार कर लिया है।
प्रशासन द्वारा मानी गई प्रमुख मांगें:
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एसीपी (ACP) हुई जारी: वर्ष 2018 बैच के चालक कर्मचारियों की लंबे समय से रुकी हुई एसीपी जारी कर दी गई है। इसके साथ ही वर्ष 2012 बैच के वेटिंग परिचालकों (कंडक्टर्स) की एसीपी भी बहाल कर दी गई है। शेष बचे मामलों को भी जल्द निपटाने का भरोसा दिया गया है।
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रजिस्टर प्रणाली दोबारा शुरू: रात्रि ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों से भरवाए जाने वाले अतिरिक्त फॉर्मों को अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसकी जगह पहले की तरह ही पारंपरिक रजिस्टर प्रणाली को दोबारा लागू कर दिया गया है।
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नाइट स्टे पर 8 जुलाई तक का समय: रात्रि ठहराव (नाइट स्टे) से संबंधित सैंक्शन मुख्यालय से मिल चुका है। इसे अकाउंट शाखा में पूरी तरह लागू करवाने के लिए समिति ने महाप्रबंधक को 8 जुलाई 2026 तक का समय दिया है।
बुधवार से नियमित ड्यूटी पर लौटेंगे कर्मचारी
सांझा संघर्ष समिति ने आंदोलन के समर्थन में अपनी रात्रि ठहराव वाली बसें हिसार डिपो में खड़ी कर सहयोग देने वाले सभी चालक-परिचालक साथियों का धन्यवाद किया। मांगों पर बनी सहमति के बाद समिति ने सभी कर्मचारियों से अपनी सुविधा अनुसार बुधवार से नियमित ड्यूटी पर लौटने की अपील की है।
बैठक में एकजुटता का संकल्प
आज हुई इस अहम बैठक की अध्यक्षता राज्य कमेटी ने की, जबकि मंच संचालन मंजीत सौरखी द्वारा किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों की सभी मांगें पूरी तरह धरातल पर लागू नहीं हो जातीं, तब तक धरना और भविष्य का संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
इस बैठक में राज्य सांझा संघर्ष समिति की ओर से जयवीर घणघस, जगदीप लाठर, संदीप रंगा, सुरेंद्र सिंह, शिव कुमार श्योराण सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं हिसार डिपो से संदीप जैनवास, अजय दुहन, जितेंद्र शर्मा, कर्मवीर मसूदपुर और बजरंग लाखा सहित भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।