यमुनानगर। फिल्म ‘सतलुज’ को कथित तौर पर प्रतिबंधित किए जाने के विरोध में छछरौली स्थित किले वाले गुरुद्वारे में सिख संगत ने एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान भारी संख्या में जुटे लोगों ने फिल्म की रिलीज रोकने के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने सेंसर बोर्ड का प्रतीकात्मक पुतला फूंकते हुए केंद्र सरकार से फिल्म पर लगी कथित रोक को तुरंत हटाने की मांग की।
“इतिहास और शहीदों की विरासत को दबाने की कोशिश”
महापंचायत को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
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दोहरे मापदंड का आरोप: वक्ताओं ने कहा कि फिल्मों की मंजूरी के लिए अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं। जब अन्य विषयों पर आधारित फिल्मों को बिना किसी अड़चन के रिलीज की अनुमति मिल सकती है, तो ‘सतलुज’ को रोके जाने का कोई ठोस आधार नहीं है।
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ओटीटी पर भी रोक का दावा: प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि फिल्म को न केवल सिनेमाघरों, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रदर्शित होने से रोका गया है।
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नई पीढ़ी को दूर रखने की साजिश: संगत का कहना था कि यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि इसके जरिए सिख इतिहास और शहीदों की महान विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास और बलिदानों से परिचित कराना बेहद जरूरी है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत के जरिए सिख संगत ने केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड से अपनी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और फिल्म को जल्द हरी झंडी देने की मांग की। प्रदर्शन के अंत में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो लोकतांत्रिक तरीके से इस आंदोलन को और अधिक तेज और व्यापक किया जाएगा।



