चंडीगढ़। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर मची अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच की गुटबाजी ने आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संकट को सुलझाने के लिए पंजाब कांग्रेस मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल खुद चंडीगढ़ के पांच दिवसीय दौरे पर हैं।
इस बीच, दिल्ली दरबार (कांग्रेस हाईकमान) ने पंजाब संगठन को लेकर अपना आखिरी और बड़ा फैसला सुना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, तमाम विरोधों के बावजूद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। हाईकमान के इस फैसले को चन्नी गुट के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
बघेल की मैराथन बैठक, चन्नी-रंधावा ने बनाई दूरी
विवाद को शांत करने के लिए प्रभारी भूपेश बघेल ने कांग्रेस भवन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिला अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों (राज कुमार वेरका व सुखविंदर सिंह डेनी) के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। हालांकि, इस बैठक की शुरुआत ही अंतर्विरोधों के साथ हुई:
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दिग्गजों की बेरुखी: पार्टी को एकजुट करने की इस कवायद से पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे बड़े चेहरे गायब रहे। हालांकि, बैठक में जाने से पहले राज कुमार वेरका ने चन्नी से मुलाकात जरूर की थी।
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संगठन में फेरबदल से इनकार: रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव सिर पर होने के कारण आलाकमान फिलहाल संगठनात्मक ढांचे में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहता। नेतृत्व का मानना है कि इस समय बदलाव करने से अन्य चुनावी राज्यों पर भी इसका गलत असर पड़ सकता है।
राजा वडिंग की सफाई: “पार्टी में सब ऑल इज वेल है”
चन्नी और अन्य बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठ रहे सवालों के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। उन्होंने मीडिया के सामने सफाई देते हुए कहा:
“पार्टी में सब कुछ ठीक है। जो नेता बैठक में नहीं आए, उनमें से कुछ (जैसे राजिंदर बेरी और संजय तलवाड़) अमरनाथ यात्रा पर गए हुए हैं। मीडिया को मसालेदार खबरें चाहिए, लेकिन हमारे यहाँ विवाद जैसा कुछ नहीं है। बहुत जल्द पंजाब कांग्रेस के सभी नेता एक मंच पर आकर एकजुटता का संदेश देंगे।”
कलह के बीच तीनों कार्यकारी प्रधानों को मिली नई कमान
गुटबाजी को थामने और चुनावी तैयारियों को रफ्तार देने के लिए प्रभारी भूपेश बघेल ने पंजाब के तीनों कार्यकारी अध्यक्षों को जिलों और सह-प्रभारियों के साथ तालमेल की नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं:
| कार्यकारी प्रधान का नाम | सह-प्रभारी (जिनके साथ समन्वय करना है) | आवंटित जिलों की जिम्मेदारी |
| सुखविंदर सिंह डैनी | सूरज ठाकुर | 42 जिले |
| संगत सिंह | रविंद्र दलवी | 45 जिले |
| राज कुमार वेरका | हीना कवाडे | 30 जिले (विधानसभा क्षेत्रों सहित) |
चुनौती बरकरार: भले ही राजा वडिंग की कुर्सी सुरक्षित रख कर और कार्यकारी प्रधानों को जिम्मेदारियां बांटकर आलाकमान ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया है, लेकिन जिस तरह चन्नी समर्थकों ने सार्वजनिक रूप से वडिंग को हटाने की मांग की थी, उसे देखते हुए पंजाब कांग्रेस की यह राह इतनी आसान नजर नहीं आती।



