सिरसा (हरियाणा): हरियाणा का मल्लेवाला गांव, जो कभी घग्गर नदी के निर्मल जल और हरियाली के लिए जाना जाता था, आज एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा से जूझ रहा है। अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी घग्गर नदी अब इस गांव के लिए अभिशाप बन गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि नदी के जहरीले पानी के कारण इलाके में कैंसर के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसने पिछले एक दशक में दर्जनों परिवारों को उजाड़ दिया है।
यादों में साफ पानी, हकीकत में जहर
गांव के निवासी सुरेश कुमार उन दिनों को याद करते हैं जब घग्गर का पानी इतना साफ था कि मछलियाँ स्पष्ट दिखाई देती थीं। लेकिन 2007 के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ी। आज नदी का पानी न केवल सिंचाई के लिए अनुपयुक्त है, बल्कि इससे आने वाली दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। मल्लेवाला में पिछले दस सालों में कैंसर से 25 से 30 लोगों की मौत हो चुकी है, और हर दूसरा घर इस घातक बीमारी के निशान लिए हुए है।
इलाज के लिए दर-दर भटकते परिवार
कैंसर के इलाज का भारी-भरकम खर्च परिवारों की कमर तोड़ रहा है। सिरसा में आधुनिक कैंसर सुविधाओं के अभाव में मरीजों को हिसार, चंडीगढ़, बठिंडा, जयपुर या बीकानेर जैसे दूर-दराज के शहरों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। गुरलाल सिंह जैसे कई लोग हैं, जिन्होंने इलाज के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी है।
आंकड़ों का घालमेल और प्रशासनिक सुस्ती
हरियाणा में कैंसर के मामलों को लेकर सरकारी आंकड़ों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर है:
-
सरकारी रिपोर्ट बनाम वास्तविकता: राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2020-24 के बीच हरियाणा में कैंसर के औसतन 110 मामले प्रति वर्ष रहे हैं, जबकि ICMR की रिपोर्ट में यह संख्या कहीं अधिक है।
-
विफल परियोजना: ‘हरियाणा कैंसर एटलस’ परियोजना, जिसे कैंसर के सही बोझ का पता लगाने के लिए शुरू किया गया था, निजी अस्पतालों के असहयोग और प्रशासनिक उदासीनता के कारण प्रभावी साबित नहीं हो सकी।
-
प्रशासनिक रुख: स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कैंसर के मामलों में किसी भी “असामान्य वृद्धि” से इनकार किया है। हालांकि, सरकार अब सिरसा में एक समर्पित कैंसर विंग के साथ नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ा रही है।