चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने गांवों में ‘लाल डोरा’ और ‘स्वामित्व योजना’ से संबंधित विवादों को तेजी से सुलझाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अब इन विवादों का निपटारा विकास एवं पंचायत विभाग के बजाय राजस्व विभाग (Revenue Department) के अधिकारी करेंगे।
बीडीपीओ-डीडीपीओ से वापस ली गई जिम्मेदारी
अभी तक प्रदेश में स्वामित्व अधिकारों और लाल डोरे से जुड़े झगड़ों को सुलझाने का जिम्मा जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) और खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) के पास था। विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक अनीश यादव की ओर से सभी उपायुक्तों (DCs) को भेजे गए पत्र के अनुसार, अब यह कार्यभार राजस्व विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
कौन संभालेगा जिम्मेदारी?
विवादों की गंभीरता और स्तर के हिसाब से दो श्रेणियों में अधिकारियों की नियुक्ति की गई है:
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तहसीलदार (प्रथम श्रेणी): मुख्य विवादों के समाधान के लिए।
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नायब तहसीलदार (द्वितीय श्रेणी): प्राथमिक शिकायतों और विवादों के निस्तारण के लिए।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
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अनावश्यक देरी से बचाव: अब तक इन मामलों के निस्तारण के लिए स्पष्ट निर्देशों का अभाव था, जिसके कारण फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती थीं।
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राजस्व रिकॉर्ड की बेहतर समझ: चूंकि तहसीलदार और नायब तहसीलदार जमीन के रिकॉर्ड (राजस्व विभाग) से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए वे स्वामित्व के अधिकारों का सटीक और तेजी से फैसला कर पाएंगे।
जनता को क्या होगा लाभ?
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तेजी से होगा निपटारा: अब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने मालिकाना हक से जुड़े विवादों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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प्रक्रिया में स्पष्टता: राजस्व विभाग के शामिल होने से विवादों के समाधान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत होगी।