कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र जिले के गांव बारना में स्थित प्रतिष्ठित ‘सुपर-100’ स्कूल इस समय गंभीर विवादों के घेरे में है। पिछले कुछ दिनों (17 मई और उसके बाद वीरवार) के भीतर संस्थान से तीन छात्राओं के दीवार फांदकर भागने के मामले सामने आए हैं। छात्राओं द्वारा छोड़े गए पत्रों, वायरल ऑडियो और परिजनों के आरोपों ने संस्थान के भीतर के माहौल और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसी छात्रा ने पत्र में परिजनों के नंबर लिखकर ‘मौत’ जैसी खौफनाक बात लिखी है, तो किसी ने ‘मन नहीं लग रहा, हमें नवोदय वापस भेजो’ की गुहार लगाई है। वहीं बाहर आई एक छात्रा ने संस्थान में बच्चों की पिटाई किए जाने का भी सनसनीखेज आरोप लगाया है।
परिजनों का प्रदर्शन: 4 घंटे तक बच्चों से मिलने पर रोक
छात्राओं के भागने और प्रताड़ना की खबर मिलते ही शुक्रवार को कई जिलों से आए अभिभावकों ने सुपर-100 परिसर के बाहर जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें करीब चार घंटे तक अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। बाद में जब उप जिला शिक्षा अधिकारी ने दखल दिया, तब कहीं जाकर अभिभावकों को बच्चों से मिलने की इजाजत मिली और तीन बच्चों को उनके माता-पिता के साथ घर भेजा गया।
गायब होने के 17 घंटे बाद प्रबंधन ने दी सूचना, सुरक्षा पर उठे सवाल
संस्थान की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छात्राओं के गायब होने के घंटों बाद तक परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी गई:
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केस 1 (17 मई): करनाल के फफड़ाना गांव के रहने वाले राजन की बेटी परिसर से भागकर किसी तरह घर पहुंची। पिता का आरोप है कि संस्थान प्रबंधन ने करीब 17 घंटे तक उन्हें कोई सूचना नहीं दी। बाद में फोन कर सिर्फ इतना पूछा कि ‘क्या आपकी बेटी घर पहुंच गई है?’ पीड़ित पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने रात 10 बजे एक डेरे से उन्हें जानकारी दी, जिसके बाद वे उसे घर लाए। डरी-सहमी छात्रा पिछले चार दिनों से असंध के एक निजी अस्पताल में भर्ती है।
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केस 2 (वीरवार): वीरवार शाम करीब 4 बजे नूंह (तावडू) और जींद की दो और छात्राएं दीवार फांदकर भाग गईं। तावडू निवासी महिला रजनी ने बताया कि उन्हें संस्थान से नहीं बल्कि एक अनजान नंबर से बेटी का फोन आया कि ‘हम भाग आई हैं’। रजनी के अनुसार, शनिवार सुबह 9 बजे संस्थान ने उन्हें बेटी के भागने की सूचना दी और सवाल पूछने पर फोन काट दिया।
मानसिक दबाव और जबरन बयान लिखवाने के आरोप
परिजनों ने संस्थान पर बच्चों को मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत करने पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) देने से मना किया जा रहा है। साथ ही आरोप है कि प्रबंधन परिजनों पर दबाव बनाकर जबरन लिखित बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग मांग रहा है कि ‘वे अपनी मर्जी से बच्चे ले जा रहे हैं और संस्थान से कोई शिकायत नहीं है।’
प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि उन्हें स्कूल परिसर में हंगामे की सूचना मिली थी। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर उप जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा गया, जिन्होंने मामला शांत करवाया और दो-तीन बच्चों को उनके परिजनों के साथ घर भेजा। दूसरी तरफ, इस गंभीर विवाद पर सुपर-100 संस्थान प्रबंधन ने मीडिया से किसी भी तरह की बात करने से साफ इनकार कर दिया है।