ENTERTAINMENT DESK : अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व नाम Punjab 95) को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म निर्माता अनुराग बसु ने निर्देशक हनी त्रेहान का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि फिल्म के साथ जो कुछ हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी तुलना उन्होंने ईरान के मशहूर फिल्मकार जाफर पनाही के संघर्ष से की। अनुराग बसु ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारत में भी किसी फिल्म निर्माता को अपनी फिल्म रिलीज कराने के लिए इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हनी त्रेहान ने इस फिल्म पर वर्षों तक मेहनत की, लेकिन इसके बावजूद फिल्म लगातार विवादों और रुकावटों का सामना करती रही।
बसु ने कहा कि “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन भी आएगा। हनी त्रेहान जिस स्थिति से गुजर रहे हैं, उसने मुझे ईरानी निर्देशक जाफर पनाही की याद दिला दी।” उन्होंने कहा कि किसी फिल्मकार के लिए अपनी बनाई फिल्म दर्शकों तक न पहुंचा पाना सबसे बड़ा दर्द होता है। ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म है। पहले इसका नाम ‘Punjab 95’ रखा गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड के साथ लंबे विवाद और कई संशोधनों के बाद इसका नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया। हाल ही में फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
फिल्म को लेकर देशभर में बहस जारी है। एक ओर फिल्म जगत के कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। अनुराग बसु ने कहा कि सिनेमा समाज की कहानियां कहने का माध्यम है और फिल्मकारों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा देखने को नहीं मिलेंगी और दर्शकों को अच्छी फिल्मों तक आसानी से पहुंच मिलेगी।



