नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की पुलिस व्यवस्था में सुधार और आधुनिकीकरण को गति देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। हरियाणा कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक मित्तल को ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) का नया महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी इस नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आलोक मित्तल पदभार संभालने के दिन से लेकर 30 जून 2029 तक या अगले आदेश (जो भी पहले हो) तक इस बेहद महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं देंगे।
क्यों अहम है BPR&D और इसका महानिदेशक पद?
BPR&D केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली देश की सबसे शीर्ष पुलिस अनुसंधान संस्था है। इसका मुख्य कार्य निम्नलिखित है:
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पुलिस आधुनिकीकरण और रिसर्च: देशभर की पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाना और नई तकनीकों का विकास करना।
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क्षमता निर्माण व फोरेंसिक: पुलिस फोर्स को एडवांस ट्रेनिंग देना, फोरेंसिक तकनीकों को बढ़ावा देना और पुलिस सुधार लागू करना।
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बेहतर समन्वय: केंद्र और राज्य की पुलिस ताकतों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना।
इन्हीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के कारण इस संगठन के महानिदेशक (DG) का पद देश की सुरक्षा और पुलिसिंग के लिहाज से बेहद खास माना जाता है।
तीन दशकों का अनुभव और केंद्रीय एजेंसियों में रहा दबदबा
आईपीएस आलोक मित्तल के पास पुलिस सेवा का 30 साल से भी अधिक का लंबा और शानदार अनुभव है। उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं:
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हरियाणा में प्रमुख पद: वे हरियाणा में डीजी जेल, डीजी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), एडीजीपी सीआईडी (CID), और एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर जैसे शीर्ष पदों पर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम किया है।
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केंद्रीय एजेंसियों में कमान: आलोक मित्तल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में रहते हुए आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच की। वहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में बतौर आईजी (Inspector General) उन्होंने कई बेहद संवेदनशील मामलों का नेतृत्व किया।
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मिले राष्ट्रीय सम्मान: उनकी उत्कृष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2009 में ‘पुलिस पदक’ और वर्ष 2016 में ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ से सम्मानित किया जा चुका है।
आधुनिकीकरण को मिलेगी नई दिशा
आलोक मित्तल की इस नियुक्ति को केंद्र सरकार के पुलिस सुधार और तकनीकी नवाचार के संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके इस व्यापक अनुभव का लाभ देश को मिलेगा, जिससे साइबर अपराध नियंत्रण, आधुनिक प्रशिक्षण प्रणालियों और पुलिसिंग में नई तकनीकों के उपयोग को और अधिक गति मिलेगी।



