SPORTS DESK : फीफा विश्व कप 2026 के दौरान फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए मुकाबले के बाद नस्लभेद (Racism) का विवाद गहरा गया है। फ्रांस के स्टार फुटबॉलर किलियन एमबाप्पे ने पहली बार इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए नस्लभेदी व्यवहार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में इस तरह की घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और खिलाड़ियों का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए। यह विवाद फ्रांस के खिलाफ मैच के दौरान पराग्वे के खिलाड़ी जूनियर अमारिला (Junior Amarilla) पर लगाए गए नस्लभेदी टिप्पणी के आरोपों के बाद सामने आया। मैच के बाद इस मामले ने सोशल मीडिया और फुटबॉल जगत में व्यापक बहस छेड़ दी। फ्रांसीसी टीम के कई खिलाड़ियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई।
एमबाप्पे ने कहा कि मैदान पर प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन किसी भी खिलाड़ी के साथ उसकी नस्ल, रंग या पहचान के आधार पर अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि फुटबॉल लोगों को जोड़ने का खेल है और इसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। फ्रांसीसी फुटबॉल महासंघ ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए फीफा से निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं फीफा ने पुष्टि की है कि मैच अधिकारियों की रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो फुटेज की समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में नस्लभेद से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर खेल में समानता और सम्मान को लेकर बहस का विषय बन गया है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल सभी की नजर फीफा की आधिकारिक जांच पर टिकी है। वहीं एमबाप्पे के बयान को दुनियाभर में समर्थन मिल रहा है और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रशंसक नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।



