SPORTS DESK : फीफा विश्व कप 2026 में अमेरिका और बेल्जियम के बीच खेले गए प्री-क्वार्टरफाइनल मुकाबले के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड और मैच के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर फीफा की तीखी आलोचना हो रही है। कई फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने आरोप लगाया है कि टूर्नामेंट के दौरान राजनीति और खेल के बीच की दूरी कम होती दिखाई दे रही है। विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी और उनके पहले दिए गए बयानों को इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जाने लगा।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आरोप लगाया कि विश्व कप के दौरान ‘MAGA’ (Make America Great Again) की राजनीतिक छवि जरूरत से ज्यादा दिखाई दे रही है, जिससे टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और बेल्जियम के मुकाबले में बालोगुन को रेड कार्ड दिखाए जाने के फैसले पर भी बहस छिड़ गई। कई पूर्व खिलाड़ियों और विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बेहद कठोर था और मैच का रुख बदलने वाला साबित हुआ। दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों ने रेफरी के फैसले को खेल के नियमों के अनुरूप बताया। सोशल मीडिया पर हजारों प्रशंसकों ने फीफा की आलोचना करते हुए कहा कि विश्व कप जैसे वैश्विक टूर्नामेंट को किसी भी राजनीतिक संदेश या एजेंडे से दूर रखा जाना चाहिए।
कई पोस्ट में दावा किया गया कि खेल का मंच केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक बहस के लिए। हालांकि, फीफा की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संगठन ने केवल इतना कहा है कि मैच अधिकारियों के सभी निर्णय VAR और खेल के मौजूदा नियमों के अनुसार लिए गए हैं। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर खेल और राजनीति के रिश्ते पर बहस छेड़ दी है। अमेरिका के विश्व कप से बाहर होने के बाद बालोगुन का रेड कार्ड और ट्रंप से जुड़ी चर्चाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।



