पंचकूला: हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों और पंचकूला क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं। इस बीच पंचकूला के गांव गुमथला से बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां स्कूल से घर लौट रहे मासूम बच्चे उफनती बरसाती नदी के तेज बहाव के बीच फंस गए। गनीमत रही कि स्थानीय ग्रामीणों ने समय रहते अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को सुरक्षित नदी पार कराई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
आज़ादी के दशकों बाद भी पक्के रास्ते को तरस रहा गांव
यह स्थिति किसी एक दिन की नहीं, बल्कि इस गांव की नियति बन चुकी है:
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कोई पुल नहीं: गांव गुमथला तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्का रास्ता या परमानेंट पुल नहीं है।
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रोज का खतरा: ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को पढ़ाई, राशन या इलाज के लिए रोजाना इसी खतरनाक बरसाती नदी को पार करना पड़ता है।
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कट जाता है संपर्क: मानसून के दिनों में जब पहाड़ों पर बारिश होती है, तो नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है।
मासूमों की जिंदगी दांव पर, प्रशासन मौन
सबसे ज्यादा भुगतना स्कूली बच्चों को पड़ रहा है। हर दिन तेज बहाव और घुटनों से ऊपर तक बहते पानी के बीच से गुजरना उनके लिए मौत के कुएं में उतरने जैसा है। गुरुवार को भी जब बच्चे बीच मझधार में फंस गए, तो ग्रामीणों ने देवदूत बनकर उन्हें बाहर निकाला।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: “सिर्फ आश्वासन मिलता है, पुल नहीं”
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है:
“हम वर्षों से यहां एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। हर चुनाव में वादे होते हैं और हर मानसून में प्रशासन सिर्फ आश्वासन देकर भूल जाता है। क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?”
प्रमुख मांग: ग्रामीणों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि बिना किसी देरी के गांव गुमथला के लिए पक्के पुल का निर्माण शुरू किया जाए, ताकि मासूम बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद हो सके।



